जब 115 वर्ष बाद कुरुक्षेत्र में मिले कृष्ण और राधा ।। Acharya Shri Pundrik Goswami Ji Maharaj




कृष्ण जब वृन्दावन से मथुरा गए , फिर  लौट कर वृन्दावन कभी नही आये। कृष्ण के वृन्दावन से जाने के 115 वर्ष बाद सभी बृजवासी कृष्ण से मिलने कुरुक्षेत्र जाते है । कुरुक्षेत्र में श्री कृष्ण के साथ गोपियों व किशोरी के मध्य हुए संवाद का वर्णन  आचार्य श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज ने (श्रीमद् गीता जयंती पर सम्पन्न हुई श्रीमद् भागवत कथा में समापन दिवस (18 दिसम्बर 2018) पर) किया
ज्यों की त्यों.
श्री महाराज जी वर्णन करते है.......

कुरुक्षेत्र में कृष्ण खड़े है और सखियाँ खड़ी है।  गोपियाँ कहती हैं 
कृष्ण अभी भी अवसर है चलो वृन्दावन चलो ।.................
(प्रेम कभी भी बूढ़ा नही होता, प्रेम की कोई आयु नही होती। तन की आयु है, तन जितना बीतता जाता है बूढ़ा होता जाता है, प्रेम जितना बीतता जाता है जवान होता जाता है। काम बूढ़ा होता है प्रेम नही)
(मैं अभी एक श्लोक की व्याख्या कर रहा हूँ, हैं बहुत से।)

गोपियों ने सब से पहला कटाक्ष किया   आओ द्वारिकाधीश। और अच्छे हो? कैसे हो?
(इस से बड़ा कटाक्ष श्री कृष्ण के लिए दूसरा नही हो सकता) चलो अभी भी विलम्ब नही हुआ वृन्दावन चलें


(भगवान् थोड़े तत्वदर्शी बन कर बोले)
भगवान ने कहा  देखो मैं तो सब के हृदय में रहता हूँ, सब के मन में हूँ कहीं दूर थोड़े ही ना हूँ।
(जैसे ऊपर लीपा-पोती की जाती है ना, उपदेशी व्यक्ति बोलता है, बड़े दर्शन की बात करता है वैसे ही भगवान् बोले।)
अपने मन में टटोल लो मैं तुम्हे वहीँ मिल जाऊंगा। मन ही तो तुम्हारा वृन्दावन है।

अभी तक ललिता विशाखा सखियाँ बात कर रही थीं राधिका चुप खड़ी थी पर अब राधिका बोली
कृष्ण अच्छी बात कही। तुम सबके मन में होगे मेरे मन में नही। तुमने मेरा मन ही नही जाना तो तुम मेरे मन में कहाँ से आओगे। तुम जानते हो मेरा मन क्या है?
कृष्ण बोले आप बताओ?
किशोरी जी बोलीं  मेरा मन है वृन्दावन 
(श्री राधे हृदि ते रसेन जड़िमा
वो लोग भूल करते है जो कहते कि राधारानी वृन्दावन में रहती है
राधारानी वृन्दावन में नही रहती, वृन्दावन राधारानी में रहता है)

तुम वहां हो तो मेरे मन में हो।
बस यही कहना था, चलती हूँ मैं

कृष्ण ठगा खड़ा था गोपियां मुड़ कर चल दी, राधिका जा रही है।
और मेरा  मन कहता है उस समय कृष्ण के मन से एक पुकार निकली होगी

श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे

श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
वृन्दावन में रास के समय  कृष्ण चला गया तब गोपी पुकारती थी  हे कृष्ण! हे कृष्ण! हे कृष्ण!
आज राधिका जा रही है और हाथ उठाता आंसू बहता, एक हाथ में लकुटी और एक हाथ मैं वंशी पकडे गोपाल पुकार रहा है
श्री राधे जय राधे
श्री राधे जय राधे
नाम  संकीर्तनं यस्य  सर्व पाप प्रणाशनम् ।
 प्रणामो दुःख शमनः तं नमामि हरिं परम् ॥
एक बार कृष्ण के साथ फिर पुकार लो
श्री राधे जय राधे
श्री राधे जय राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे
श्री राधे जय राधे राधे राधे श्री राधे  
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