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अपनी बहन के लिए नही, इस वजह से रावण ने किया था सीता हरण।। Acharya Shri Pundrik Goswami Ji Maharaj

Why Ravana kidnapped Sita? Shrimad Valmikiy Ramayan. Acharya Shri Pundrik Goswami Ji Maharaj.




बड़ोदरा (गुजरात) में संपन्न हुई श्रीमद् वाल्मीकीय रामायण कथा में  परम श्रद्धेय आचार्य श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज ने सीताहरण के सम्बन्ध में "रावण जैसा भाई हो" विचारधारा का भ्रमोच्छेदन किया। (11जनवरी 2019)
ज्यों की त्यों

श्री रघुपुङ्गव ने खर और दूषण का भयंकर वध किया।
अनेक सर्गों में उसके अनुपम प्रसंग का वर्णन हुआ है। चौदह हजार राक्षसों का वध हुआ है त्रिसरा का वध हुआ, इसका बड़ा विकट वर्णन वाल्मीकीय रामायण में हुआ है। 
खरदूषण  का वध हुआ।
सूपर्णखा लंका पहुची

बड़े बड़े लोग विचार करते है कि रावण बहुत बढ़िया भाई था।

एक दो साल से सोशल मिडिया पर कुछ मैसेज वायरल हो रहे थे।
की भाई रावण जैसा हो, उसकी बहन के नाक कान काटोगे तो वो यही करेगा।
तुम्हारी पत्नी उठा कर के ले आया तो इसमें राम जी की गलती है लक्ष्मण जी की गलती है।
रावण जैसा भाई

गर्भवती माँ ने बेटी से पूछा क्या चाहिए तुझे?
बहन या भाई..!!
बेटी बोली भाई !!
माँ: किसके जैसा?
बेटी: रावण सा....!
माँ: क्या बकती है?
पिता ने धमकाया, माँ ने घूरा, गाली देती है ??
बेटी बोली, क्यूँ माँ?
बहन के अपमान पर राज्यवंश और प्राण लुटा देने
वाला,,
शत्रु स्त्री को हरने के बाद भी स्पर्श न करने
वाला रावण जैसा भाई ही तो हर
लड़की को चाहिए आज,
माँ सिसक रही थी - पिता आवाक था


आप वाल्मीकि रामायण का विवेचन सुनोगे तब आपको सत्य का ज्ञान होगा।।


सूर्पनखा पहुंची
हे! भैया हे! भैया
रावण का दरबार लगा था रावण चिल्लाया क्यों शोर करती है, मैं मंत्रणा कर रहा हूँ यहाँ सब बैठे है क्यों शोर करती है।

तेरा ये हाल कैसे हुआ है
सूर्पनखा ने  विस्तार से प्रसंग बताया
रावण बोला निश्चित रूप से ये तेरी भूल होगी

प्रमत्तः काम भोगेषु स्वैर वृत्तो निरंकुशः ।
समुत्पन्नम् भयम् घोरम् बोद्धव्यम् न अवबुध्यसे ॥३-३३-२॥

तेरा स्वभाव है प्रमत्त रहना, तू भयंकर कामी है।  निरंकुश है, इसलिए मैंने तुझे लंका से दूर दंडकारण्य में छोड़ा हुआ है क्यों कि तू लंका में रह कर यहाँ  अनावश्यक विवाद करती रहती है।

सूर्पनखा रावण को भड़काने के लिए बड़े बड़े वर्णन करते हुए बोली
लंका की लाज कट गयी
बहन के ऊपर हाथ उठाया
दुनिया में कौन रावन का नाम लेगा?....

रावण बोला चुप कर
लंका के ऊपर कुछ नही हुआ क्यों कि तू खुद ही दुराचारणी है हमें मालूम है।



सूर्पनखा ने मन में विचार किया ऐसे काम नही चलेगा।

तब उसने रावण के दरबार में खड़े हो कर किशोरी जी के रूप लावण्य का वर्णन किया।

ठीक बात है भैया, पर तू क्या जाने, तू अपने रूप अपने सामर्थ्य अपने राज्य अपनी लक्ष्मी पर मदस्कृत हो कर घूमता है, तेरे पास कुछ नही है जो उन तपस्वियों के पास है। मेरा कोई दोष नही है कि मैं राम के रूप के ऊपर मुग्ध हो जाऊं, क्यों कि वो है ही इतना अदभुत है।

कः च रामः कथम् वीर्यः किम् रूपः किम् पराक्रमः । 3-34-2

मैंने ऐसा रूप और पराक्रम नही देखा।

तो रावण के मन में जिज्ञासा जगी
कि अगर ऐसा पराक्रमी राम है तो वो सूर्पनखा पर मुग्ध क्यों नही  हुआ?

इसी भाव भंगिमा को आगे ले जा कर सूर्पनखा वर्णन करती है

मैं उस पर मुग्ध थी पर वो इतना वीर पराक्रमी राम भी अपनी प्रिया जानकी पर मुग्ध था।

दीर्घबाहुः विशालाक्षः चीर कृष्ण अजिन अम्बरः ॥३-३४-५॥
कन्दर्प सम रूपः च रामो दशरथ आत्मजः ।३-३४-६

इतना सुंदर विशालाक्षी, और वो किस पर मुग्ध था

यस्य सीता भवेत् भार्या यम् च हृष्टा परिष्वजेत् ।
अति जीवेत् स सर्वेषु लोकेषु अपि पुरंदरात् ॥३-३४-१९॥

अरे ये मंदोदरी जैसे बड़ी बड़ी तेरी रानियां  उसकी सेविका बनने के लायक नही है

सूर्पणखा ने ऐसे जानकी के रूप लावण्य सौंदर्य का वर्णन किया कि रावण बीमार पड़ गया...

हनुमान जी हनुमन्नाटकम् में वर्णन कर रहे है

रावण तुरन्त सभा से उठ  कर चला आया अपने कक्ष में बैठा।
 प्रतिदिन रावण के यहाँ ब्रह्मा जी रावण को अध्ययन कराने आते है, बृहस्पति जी पाठ करने आते  है और कुमरु गंधर्व संगीत का आनन्द कराने आते है। आज वो तीनों आये तो रावण का द्वारपाल कहता है
  चले जाओ चले जाओ वापस।
ब्रह्मा जी आज रावण जी के पढ़ने का मन नही है वापस लौट जाइये।
ऐ वृहस्पति जी चुप हो जाओ
ये तुम्हारे इंद्र की सभा नही है
कुमरु यहां से वापस चले जाइये।

तीनो ने पूछा द्वारपाल जी क्या हुआ है दशानन को आज?

द्वारपाल बोला
सीतारल्लकभल्लभग्नमनसा: स्वस्थो न लंकेश्वर:।

सीता के भौं रूपी भाले से रावण का मन बिद्य हो  गया है, बेचारा छाती पकड़ा भीतर बैठा है, बीमार है, अस्वस्थ्य है।



रावण अपने कक्ष में बैठा बैठा मंत्रणा करता था
कोई ना कोई माया के द्वारा इस कृत्य (सीता हरण) को करना पड़ेगा।
जिसने खर और दूषण का वध कर दिया।
चौदह हजार उनके सैनिकों का वध कर दिया, सूर्पनखा भी कम पराक्रमी नही थी उसके भी नाक कान काट दिए।
युद्ध तो मैं इनके साथ करूँगा लेकिन पहले विजय वस्तु का अपहरण कर लाऊँ फिर करूँगा।।

रावण अपनी बहन की लाज बचाने नही गया है, ये तो सीता के सौंदर्य पर मुग्ध हो कर गया है।
कामी की तरह गया है।


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अपनी बहन के लिए नही, इस वजह से रावण ने किया था सीता हरण।। Acharya Shri Pundrik Goswami Ji Maharaj
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